Wednesday, 24 January 2018

राजनीति में सफलता के योग @ Astrologer Shivam

👉👉राजनीति में सफलता के योग 👈👈
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आज के समय में राजनेताओं को वही महत्व प्राप्त है जो प्राचीन समय में एक राजा का होता था। किसी भी देश या राज्य की उन्नति और समृद्धि उसके राजनैतिक नेताओं की सूझ-बूझ, इच्छाशक्ति और कार्यकुशलता पर निर्भर करती है वहीँ जनता के मध्य और विभिन्न प्रतियोगियों के साथ एक सफल राजनेता बनना भी किसी चुनौती से कम नहीं है एक सफल राजनेता में जहाँ अच्छी बौद्धिक कुशलता, वाक्शक्ति, अच्छी निर्णय-शक्ति आदि गुण होने चाहियें वहीँ उसमे जनता के बीच जाकर उनका विश्वास जीतने की कला भी होनी चाहिये, तो कौनसे ग्रह और ग्रहस्थितियां एक व्यक्ति को राजनीति में सफलता दिलाते हैं
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ज्योतिष में सरकार, सरकारी कार्य, सत्ता और राजनीती के लिए "सूर्य" को ही कारक माना गया है "शनि" जनता और जनता से मिलने वाली सपोर्ट का कारक है इसी तरह कुंडली का "चतुर्थ भाव" भी जनता की सपोर्ट को दिखाता है इसके आलावा कुंडली का छठा भाव प्रतिस्पर्धा और विरोधियों तथा तीसरा भाव अपनी शक्ति और पराक्रम का कारक होने से राजनीती में अपनी सहायक भूमिका निभाते हैं।" Friends Who Like Astrologer Shivam
सूर्य - राजनीति के क्षेत्र में सफलता के लिए सूर्य ही सर्वाधिक महत्वपूर्ण ग्रह है क्योंकि सूर्य को ही सरकार और सत्ता का कारक माना गया है इसके आलावा शाशन की कुशलता, प्रसिद्धि, प्रीतिष्ठा, इच्छाशक्ति और यश का का कारक भी सूर्य ही होता है और राजनीती में आगे बढ़ने के लिए प्रसिद्धि , प्रतिष्ठा का होना बहुत आवश्यक है इसलिए भी राजनीती में सफलता पाने के लिए कुंडली में सूर्य का बलि होना बहुत आवश्यक है। Friends Who Like Astrologer Shivam
शनि - शनि को जनता और जनता से मिलने वाली सपोर्ट का कारक माना गया है और सक्रीय राजनीति में सफल होने के लिए जनता का साथ मिलना बहुत आवश्यक है अतः कुंडली में बलवान शनि जनता का सहयोग दिलाकर व्यक्ति को सफल राजनेता बनाता है।
मंगल- किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धा में जीत के लिये मंगल का बली होना आवश्यक है। कोई व्यक्ति अच्छा राजनितिक हो सकता है परन्तु बिना बली मंगल के चुनाव नहीं जित सकता Friends Who Like Astrologer Shivam
चतुर्थ-भाव - कुंडली का चौथा भाव भी जनता का कारक है अतः राजनीती में सफलता के लिए कुंडली के चतुर्थ भाव और चतुर्थेश का बलि होना भी बहुत आवश्यक हैl
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षष्ठ और तृतीय भाव - कुंडली का छठा और तीसरा भाव प्रतिस्पर्धा,विरोधी तथा अपने स्वाम के बल को दर्शाता है अतः कुंडली में इन दोनों भावों का बलि होना भी राजनीती में सहायक होता है तथा विरोधियों पर विजय दिलाकर प्रतिस्पर्धा में आगे रखता है Friends Who Like Astrologer Shivam
निष्कर्ष - राजनैतिक सफलता के लिए मुख्य घटक सूर्य , शनि और चतुर्थ भाव ही होते हैं सूर्य सीधे-सीधे सत्ता और राजनीति का कारक है ही तथा शनि व् चतुर्थ भाव जनता का सहयोग दिलाते हैं अतः निष्कर्षतः राजनैतिक सफलता के लिए कुंडली में सूर्य , शनि और चतुर्थ भाव का अच्छी स्थिति में होना बहुत आवश्यक है। अब यहाँ एक महत्वपूर्ण बात और है राजनीति के क्षेत्र में आगे बढ़ने के भी दो मार्ग हैं एक सक्रीय चुनावी राजनीति और दूसरी संगठन की राजनीति, आप राजनीती के क्षेत्र में किसी भी प्रकार जुड़े हों सफलता के लिए कुंडली में सूर्य का अच्छा होना तो आवश्यक है ही परन्तु सक्रीय चुनावी राजनीती में सफल होने के लिए शनि और चतुर्थ भाव का बलि होना बहुत आवश्यक है। जिन लोगों की कुंडली में शनि कमजोर या पीड़ित होता है उन लोगों को जनता का सहयोग न मिल पाने के कारण वे चुनावी राजनीती में सफल नहीं हो पाते अतः कमजोर शनि वाले लोगों को चुनावी राजनीती में ना जाकर संगठन में रहकर कार्य करना चाहिये। Friends Who Like Astrologer Shivam
👉👉राजनैतिक सफलता के कुछ विशेष योग 👈👈
1,यदि सूर्य स्व या उच्च राशि (सिंह, मेष) में होकर केंद्र, त्रिकोण आदि शुभ भावो में बैठा हो तो राजनीति में सफलता मिलती है।
2.सूर्य दशम भाव में हो या दशम भाव पर सूर्य की दृष्टि हो तो राजनीति में सफलता मिलती है।
3. सूर्य यदि मित्र राशि में शुभ भाव में हो और अन्य किसी प्रकार पीड़ित ना हो तो भी राजनैतिक सफलता मिलती है।
4.शनि यदि स्व, उच्च राशि (मकर , कुम्भ, तुला) में होकर केंद्र त्रिकोण आदि शुभ स्थानों में बैठा हो तो राजनीती में अच्छी सफलता मिलती है।
5.यदि चतुर्थेश चौथे भाव में बैठा हो या चतुर्थेश की चतुर्थ भाव पर दृष्टि हो तो ऐसे व्यक्ति को विशेष जनसमर्थन मिलता है।
6.चतुर्थेश का स्व या उच्च राशि में होकर शुभ स्थानं में होना भी राजनैतिक सफलता में सहायक होता है।
7. बृहस्पति यदि बलि होकर लग्न में बैठा हो तो राजनैतिक सफलता दिलाता है।
8.दशमेश और चतुर्थेश का योग हो या दशमेश चतुर्थ भाव में और चतुर्थेश दशम भाव में हो तो ये भी राजनीती में सफलता दिलाता है
9.सूर्य और बृहस्पति का योग केंद्र ,त्रिकोण में बना हो तो ये भी राजनैतिक सफलता दिलाता है।
10.. बुध-आदित्य योग (सूर्य + बुध) यदि दशम भाव में बने और पाप प्रभाव से मुक्त हो तो राजनैतिक सफलता दिलाता है।
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विशेष - कुंडली में सूर्य , शनि और चतुर्थ भाव बलि होने के बाद व्यक्ति को राजनीति में किस स्तर तक सफलता मिलेगी यह उसकी पूरी कुंडली की शक्ति और अन्य ग्रह स्थितियों पर निर्भर करता है। Friends Who Like Astrologer Shivam
"मोदी जी "की जन्मपत्रिका में मंगल लग्न व छठे भाव का स्वामी होकर लग्न में चन्द्रमा के साथ नीच भंग राज योग बना रहा है.. चतुर्थ भाव का स्वामी शनि दशम में बैठकर चतुर्थ भाव को ही देख रहा है। सूर्य एकादश भाव में बली होकर बैठा है.. अतः पूर्ण राज योग है
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जिन लोगो की कुंडली में सूर्य नीच राशि (तुला) में हो राहु से पीड़ित हो अष्टम भाव में हो या अन्य प्रकार पीड़ित हो तो राजनीति में सफलता नहीं मिल पाती या बहुत संघर्ष बना रहता है। शनि पीड़ित या कमजोर होने से ऐसा व्यक्ति चुनावी राजनीति में सफल नहीं हो पाता, कमजोर शनि वाले व्यक्ति की कुंडली में अगर सूर्य बलि हो तो संगठन में रहकर सफलता मिलती है। Friends Who Like Astrologer Shivam
👉👉 उपाय - राजनीती से जुड़े या राजनीती में जाने की इच्छा रखने वाले लोगों को सूर्य उपासना अवश्य करनी चाहिये -
१. आदित्य हृदय स्तोत्र का रोज पाठ करें।
२. सूर्य को रोज जल अर्पित करें।
३. ॐ घृणि सूर्याय नमः का जाप करें। ..............
4...माणिक्य नग अनामिका ऊँगली में धारण करें 📿


Thursday, 18 January 2018

👉किस घर में महालक्ष्मी रहती है कहा नहीं 👈👈 Astrologer Shivam


  👉किस घर में महालक्ष्मी रहती है कहा नहीं 👈👈
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1.किसी भी परिवार में सुख-शांति और लक्ष्मी का वास होना बहुत जरूरी है। लक्ष्मी का वास और सुख-शांति दोनों ही एक-दूसरे के पूरक हैं। यानी जिस घर में सुख-शांति होगी, उस घर में लक्ष्मी का वास भी होगा। कुछ लोग तो अपने घर में लक्ष्मी की कृपा बनाएं रखने के लिए टोटकों का सहारा लेते हैं, लेकिन यह सही नहीं है। Friends Who Like Astrologer Shivam
2.मधुर बोलने वाले, अपने कर्तव्य को निष्ठापूर्वक पूरा करने वाले, ईश्वर भक्त, इन्द्रियों को वश में करने वाले, व्यवहार से उदार, माता-पिता की सेवा करने वाले, क्षमाशील, दानशील, बुद्धिमान, दयावान और गुरु की सेवा करने वाले लोगों के घर में सदैव लक्ष्मी का वास बना रहता है। Friends Who Like Astrologer Shivam
3.जो व्यक्ति अपने जीवन में अन्न का सम्मान करते हैं। उनके घर में लक्ष्मी का वास रहता है। जो लोग अन्न का अनादर करते हैंया उनके घर में अन्न पैरों में पड़ा रहता है, उस घर से लक्ष्मी रुठ जाती है। जिस घर में अतिथि का स्वागत होता है उस घर में लक्ष्मी निश्चित रूप से अपना स्थान बनाए रखती है। Friends Who Like Astrologer Shivam
4.ऐसा व्यक्ति जो झूठ नहीं बोलता, अपने विचारों से अलग दूसरों के बारे में भी सोचता है। परिवार और समाज में अन्य लोगों के प्रति प्रेम की भावना रखता है। दूसरों के दुख से दुखी होकर उनकी सहायता करने वाले लोगों के घर में लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। इसके अलावा जिस घर में पशु-पक्षियों का निवास होता है, उस घर में भी लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है। Friends Who Like Astrologer Shivam
5.ऐसा घर जिसमें पत्नी के लिए पति धर्म सर्वोपरि होता है यानी जो स्त्रियां अपने पति का सम्मान करती हैं। उनकी आज्ञा का पालन करती हैं। घर में सभी को भोजन कराने के बाद स्वंय भोजन करती हैं। ऐसे घर से सदैव लक्ष्मी प्रसन्न रहती है। Friends Who Like Astrologer Shivam
6.जिस घर की स्त्री सुंदर, हिरणी के समान नेत्र वाली, पतली कमर वाली, सुंदर बालों वाली और बोलचाल में सुशील व सौम्य हो, उस घर में भी लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। Friends Who Like Astrologer Shivam
7.जिस घर का मुखिया या अन्य परिजन सूर्योदय के बाद तक सोते रहते हैं, ऐसे घर में लक्ष्मी लंबे समय तक विराजमान नहीं रहती। साथ ही आलसी लोग, ईश्वर में विश्वास नहीं करने वाले, भ्रष्टाचारी, चोर तथा कपटी किस्म के लोगों के यहां भी लक्ष्मी की कृपा लंबे समय तक नहीं रहती। Friends Who Like Astrologer Shivam
8.जिस घर में नित्य प्रति सफाई नहीं होती या जो स्त्री खुद साफ-सुथरी नहीं रहती, ऐसे घर में लक्ष्मी का वास नहीं होता। यदि किसी घर की स्त्री दिन के समय सोती रहती है और सास-ससुर का अनादर करती है, उस घर में लक्ष्मी का वास नहीं होता। ऐसे घर में लक्ष्मी कम समय के लिए ही ठहरती है जहां सुबह और शाम के समय ईश्वर की उपासना नहीं होती।
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9.जिस घर में छोटी-छोटी बातों को लेकर कलह का वातावरण बना रहता है। ऐसा पति या ऐसे सास-ससुर जो बात-बात पर अपनी पत्नी या बहू का अपमान करते हैं। उसके साथ नौकरानी जैसा व्यवहार करते हैं, ऐसे घर से लक्ष्मी दूर रहने लगती है। साथ ही ऐसा घर जिसमें लक्ष्मी स्त्रोत का पाठ नहीं होता और धन का अपव्यय होता है, उस घर के लोगों को लक्ष्मी का सुख कभी प्राप्त नहीं होता। Friends Who Like Astrologer Shivam
10.जिस घर के सदस्य मांस- मदिरा का सेवन करते हैं, उस घर से लक्ष्मी दूर चली जाती है। शास्त्रों में भी कहा गया है कि मांसाहारी लोगों के घर में लक्ष्मी का वास नहीं रहता। जो महिलाएं अपने घर में पूजा का स्थान नहीं रखती, उनके घर से लक्ष्मी दूरी बना लेती है और वह घर हमेशा कर्ज में दबा रहता है। Friends Who Like Astrologer Shivam
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Monday, 15 January 2018

शुक्र ग्रह को कैसे करे बलवान:-Astrologer Shivam


                                                             
 👉👉शुक्र ग्रह को कैसे करे बलवान👈👈
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शुक्र का प्रभाव:-👉भौतिक संसार में प्रत्‍येक वस्‍तु शुक्र ग्रह से जनित है इसलिए ज्‍योतिषियों ने शुक्र को सबसे उत्‍तम और श्रेष्‍ठ ग्रह बताया है। कुंडली में शुक्र की शुभ स्थिति से सभी प्रकार के भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। शुक्र के अच्‍छे प्रभाव में मनुष्‍य को प्रेम संबंधों में सफलता एवं वैवाहिक जीवन का आनंद मिलता है। साथ ही समाज में मान-सम्‍मान बढ़ता है। कुंडली में शुक्र का मजबूत होना आवश्‍यक एवं शुभ माना जाता है।
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यदि कुंडली में शुक्र ग्रह की स्थिति खराब अथवा कमजोर हो तो जातक को व्‍यक्‍तिगत सुखों की प्राप्‍ति के लिए अत्‍यंत संघर्ष करना पड़ता है। शुक्र की कमजोर स्थिति यौनांगों के रोगों का भी कारक है। अत: मनुष्‍य हर तरह से असफलताओं से घिर जाता है।
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कैसे करें कुंडली में शुक्र को मजबूत -:👉
1.शुक्र को मजबूत करने के लिए हीरा धारण किया जा सकता है।
2. विशेष सिद्ध शुक्र कवच धारण करने से विशेष लाभ होता है एवं शुक्र यंत्र की स्‍थापना भी लाभदायक होती है।
3.नियमित दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें।
4.शुक्रवार के दिन खीर खाने से भी शुक्र की स्थिति मजबूत बनती है।
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कुंडली में शुक्र को मजबूत के उपाय:-👉
1. सफेद वस्‍तु अथवा ज्‍वार का दान करें एवं कन्‍याओं का पूजन करने से लाभ मिलता है।
2.किसी पुजारी की पत्नी को चांदी, चावल, दूध, दही, श्वेत चंदन, सफेद वस्त्र तथा सुगंधित पदार्थ दान दें।
3. चंदन के तेल में कपूर डालकर उपयोग करें एवं काली चींटियों को चीनी खिलानी चाहिए।
4.शुक्रवार के दिन व्रत रखें और घर में तुलसी का पौधा लगाएं।
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👉👉शुक्र ग्रह की कृपा पाना चाहते हैं तो बहुत जरूरी है कि आप अपने घर एवं बाहर हर स्‍त्री का सम्‍मान करें। पत्नी को खुश रखने का प्रयास करें अथवा पराई स्त्री से संबंध नही रखना चाहिए। 👈👈
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शुभ स्थिति में शुक्र के लक्षण:-👉
1. जिन जातकों की कुंडली में शुक्र मजबूत होता है वे बेहद खूबसूरत होते हैं। ऐसे लोग अपनी उम्र से छोटे दिखते हैं।
2.विवाह जल्‍दी हो जाता है एवं यह वैवाहिक जीवन का भरपूर आनंद उठाते हैं।
3. इन लोगों की आंखें बहुत सुन्दर होती हैं एवं नजर भी तेज होती है।
इन्‍हें सज-संवर कर रहना, सुन्दर परिधान पहनना पसंद होता है।
जातक की त्वचा स्निग्ध और दाग- धब्बे रहित होती है।
4. यह जातक खट्टे-मीठे खाने के शौकीन होते हैं।
5.जातक अपने जीवन में हर सुख, धन-वैभव, ऐश्वर्य का उपभोग करता है।
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शुक्र यंत्र :-👉
शुक्र ग्रह को शांत करने या शुक्र के शुभ फल पाने के लिए आप अपने घर में शुक्र यंत्र की स्‍थापना भी कर सकते हैंं। इसके प्रभाव से आपको सुख-समृद्धि की प्राप्‍ति होगी।
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Wednesday, 10 January 2018

हनुमान चालीसा पढ़ने के फायदे-----Astrologer Shivam!!


हनुमान चालीसा पढ़ने के फायदे-----Astrologer Shivam!!

1. बुरी आत्‍माओं को भगाए: हनुमान जी अत्‍यंत बलशाली थे और वह किसी से नहीं डरते थे। हनुमान जी को भगवान माना जाता है और वे हर बुरी आत्‍माओं का नाश कर के लोगों को उससे मुक्‍ती दिलाते हैं। जिन लोगों को रात मे डर लगता है या फिर डरावने विचार मन में आते रहते हैं, उन्‍हें रोज हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिये।

2. साढे़ साती का प्रभाव कम करे: हनुमान चालीसा पढ़ कर आप शनि देव को खुश कर सकते हैं और साढे साती का प्रभाव कम करने में सफल हो सकते हैं।कहानी के मुताबिक हनुमान जी ने शनी देव की जान की रक्षा की थी, और फिर शनि देव ने खुश हो कर यह बोला था कि वह आज के बाद से किसी भी हनुमान भक्‍त का कोई नुकसान नहीं करेगें।


3. पाप से मुक्‍ती दिलाए:
 हम कभी ना कभी जान बूझ कर या फिर अनजाने में ही गल्‍तियां कर बैठते हैं। लेकिन आप उसकी माफी हनुमान चालीसा पढ़ कर मांग सकते हैं। रात के समय हनुमान चालीसा को 8 बार पढ़ने से आप सभी प्रकार के पाप से मुक्‍त हो सकते हैं।
4. बाधा हटाए: जो भी इंसान हनुमान चालीसा को रात में पढे़गा उसे हनुमान जी स्‍वंय आ कर सुरक्षा प्रदान करेगें।
बचपन से ही हमें सिखाया गया है कि अगर कभी भी मन अशांत लगे या फिर किसी चीज से डर लगे तो, हनुमान चालीसा पढ़ो। ऐसा करने से मन शांत होता है और डर भी नहीं लगता। हिंदू धर्म में हनुमान चालीसा का बड़ा ही महत्‍व है। हनुमान चालीसा पढ़ने से शनि ग्रह और साढे़ साती का प्रभाव कम होता है। हनुमान जी राम जी के परम भक्त हुए हैं। प्रत्येक व्यक्ति के अंदर हनुमान जी जैसी सेवा-भक्ति विद्यमान है। हनुमान-चालीसा एक ऐसी कृति है, जो हनुमान जी के माध्यम से व्यक्ति को उसके अंदर विद्यमान गुणों का बोध कराती है। इसके पाठ और मनन करने से बल बुद्धि जागृत होती है। हनुमान-चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति खुद अपनी शक्ति, भक्ति और कर्तव्यों का आंकलन कर सकता है।
जानिए हनुमान चालीसा की किस चौपाई से क्या चमत्कार होते हैं !

वैसे तो हनुमान चालीसा की हर चौपाइ और दोहे चमत्कारी हैं लेकिन कुछ ऐसी चौपाइयां हैं जो बहुत जल्द असर दिखाती हैं। ये चौपाइयां सर्वाधिक प्रचलित भी हैं समय-समय में काफी लोग इनका जप करते हैं। यहां जानिए कुछ खास चौपाइयां और उनके अर्थ। साथ ही जानिए हनुमान चालीसा की किस चौपाई से क्या चमत्कार होते हैं...

रामदूत अतुलित बलधामा। अंजनिपुत्र पवनसुत नामा।

यदि कोई व्यक्ति इस चौपाई का जप करता है तो उसे शारीरिक कमजोरियों से मुक्ति मिलती है। इस पंक्ति का अर्थ यह है कि हनुमानजी श्रीराम के दूत हैं और अतुलित बल के धाम हैं। यानि हनुमानजी परम शक्तिशाली हैं। इनकी माता का नाम अंजनी है इसी वजह से इन्हें अंजनी पुत्र कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार हनुमानजी को पवन देव का पुत्र माना जाता है इसी वजह से इन्हें पवनसुत भी कहते हैं।

महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।।

यदि कोई व्यक्ति हनुमान चालीसा की केवल इस पंक्ति का जप करता है तो
उसे सुबुद्धि की प्राप्ति होती है। इस पंक्ति का जप करने वाले लोगों के कुविचार नष्ट होते हैं और सुविचार बनने लगते हैं। बुराई से ध्यान हटता है और अच्छाई की ओर मन लगता है। इस पंक्ति का अर्थ यही है कि बजरंगबली महावीर हैं और हनुमानजी कुमति को निवारते हैं यानि कुमति को दूर करते हैं और सुमति यानि अच्छे विचारों को बढ़ाते हैं।

बिद्यबान गुनी अति चातुर। रामकाज करीबे को आतुर।।

यदि किसी व्यक्ति को विद्या धन चाहिए तो उसे इस पंक्ति का जप करना चाहिए। इस पंक्ति के जप से हमें विद्या और चतुराई प्राप्त होती है। इसके साथ ही हमारे हृदय में श्रीराम की भक्ति भी बढ़ती है। इस चौपाई का अर्थ है कि हनुमानजी विद्यावान हैं और गुणवान हैं। हनुमानजी चतुर भी हैं। वे सदैव ही श्रीराम के काम को करने के लिए तत्पर रहते हैं। जो भी व्यक्ति इस चौपाई का जप करता है उसे हनुमानजी की ही तरह विद्या, गुण, चतुराई के साथ ही श्रीराम की भक्ति प्राप्त होती है।

भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्रजी के काज संवारे।।

जब आप शत्रुओं से परेशान हो जाएं और कोई रास्ता दिखाई न दे तो हनुमान चालीसा का जप करें। यदि एकाग्रता और भक्ति के साथ हनुमान चालीसा की सिर्फ इस पंक्ति का भी जप किया जाए तो शत्रुओं पर विजय प्राप्ति होती है। श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है। इस पंक्ति का अर्थ यह है कि श्रीराम और रावण के बीच हुए युद्ध में हनुमानजी ने भीम रूप यानि विशाल रूप धारण करके असुरों-राक्षसों का संहार किया। श्रीराम के काम पूर्ण करने में हनुमानजी ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। जिससे श्रीराम के सभी काम संवर गए।

लाय संजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

इस पंक्ति का जप करने से भयंकर बीमारियों से भी मुक्ति मिल सकती है। यदि कोई व्यक्ति किसी गंभीर बीमारी से पीडि़त है और दवाओं का भी असर नहीं हो रहा है तो उसे भक्ति के साथ हनुमान चालीसा या इस पंक्ति का जप करना चाहिए। दवाओं का असर होना शुरू हो जाएगा, बीमारी धीरे-धीरे ठीक होने लगेगी। इस चौपाई का अर्थ यह है कि रावण के पुत्र मेघनाद ने लक्ष्मण को मुर्छित कर दिया था। तब सभी औषधियों के प्रभाव से भी लक्ष्मण की चेतना लौट नहीं रही थी। तब हनुमानजी संजीवनी औषधि लेकर आए और लक्ष्मण के प्राण बचाए। हनुमानजी के इस चमत्कार से श्रीराम अतिप्रसन्न हुए।

जल्दी ही इसीप्रकार से हनुमान चालीसा की कुछ और पंक्तियों के विषय में आपको जानकारी दी जाएगी आप पढ़ते रहिए जीवनमंत्र... आगे पढि़ए हनुमान चालीसा से जुड़ी खास बातें...

श्रीराम के परम भक्त हनुमानजी सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवताओं में से एक हैं। शास्त्रों के अनुसार माता सीता के वरदान के प्रभाव से बजरंग बली को अमर बताया गया है। ऐसा माना जाता है आज भी जहां रामचरित मानस या रामायण या सुंदरकांड का पाठ पूरी श्रद्धा एवं भक्ति से किया जाता है वहां हनुमानजी अवश्य प्रकट होते हैं। इन्हें प्रसन्न करने के लिए बड़ी संख्या श्रद्धालु हनुमान चालीसा का पाठ भी करते हैं। यदि कोई व्यक्ति पूरी हनुमान चालीसा का पाठ करने में असमर्थ रहता है तो वह अपनी मनोकामना के अनुसार केवल कुछ पंक्तियों का भी जप कर सकता है।

केवल हनुमान चालीसा ही नहीं सभी देवी-देवताओं की प्रमुख स्तुतियों में चालिस ही दोहे होते हैं? विद्वानों के अनुसार चालीसा यानि चालीस, संख्या चालीस, हमारे देवी-देवीताओं की स्तुतियों में चालीस स्तुतियां ही सम्मिलित की जाती है। जैसे श्री हनुमान चालीसा, दुर्गा चालीसा, शिव चालीसा आदि। इन स्तुतियों में चालीस दोहे ही क्यों होती है? इसका धार्मिक दृष्टिकोण है। इन चालीस स्तुतियों में संबंधित देवता के चरित्र, शक्ति, कार्य एवं महिमा का वर्णन होता है।

चालीस चौपाइयां हमारे जीवन की संपूर्णता का प्रतीक हैं, इनकी संख्या चालीस इसलिए निर्धारित की गई है क्योंकि मनुष्य जीवन 24 तत्वों से निर्मित है और संपूर्ण जीवनकाल में इसके लिए कुल 16 संस्कार निर्धारित किए गए हैं। इन दोनों का योग 40 होता है। इन 24 तत्वों में 5 ज्ञानेंद्रिय, 5 कर्मेंद्रिय, 5 महाभूत, 5 तन्मात्रा, 4 अन्त:करण शामिल है।

सोलह संस्कार इस प्रकार है- 1. गर्भाधान संस्कार 2. पुंसवन संस्कार 3. सीमन्तोन्नयन संस्कार 4. जातकर्म संस्कार 5. नामकरण संस्कार 6. निष्क्रमण संस्कार 7. अन्नप्राशन संस्कार 8. चूड़ाकर्म संस्कार 9. विद्यारम्भ संस्कार 10. कर्णवेध संस्कार 11. यज्ञोपवीत संस्कार 12. वेदारम्भ संस्कार 13. केशान्त संस्कार 14. समावर्तन संस्कार 15. पाणिग्रहण संस्कार 16. अन्त्येष्टि संस्कार
भगवान की इन स्तुतियों में हम उनसे इन तत्वों और संस्कारों का बखान तो करते ही हैं, साथ ही चालीसा स्तुति से जीवन में हुए दोषों की क्षमायाचना भी करते हैं। इन चालीस चौपाइयों में सोलह संस्कार एवं 24 तत्वों का भी समावेश होता है। जिसकी वजह से जीवन की उत्पत्ति है।
 
शनिवार को हनुमान जी की पूजा क्यों?
रामायण काल में जब हनुमान जी माता सीता को ढूंढ़ते हुए लंका में पहुंचे, तो उन्होंने वहां शनिदेव को उल्टा लटके देखा। कारण पूछने पर शनिदेव ने बताया कि 'मैं शनि देव हूं और रावण ने अपने योग बल से मुझे कैद कर रखा है।' तब हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के कारागार से मुक्ति दिलाई।
शनि देव ने हनुमान जी से वर मांगने को कहा। हनुमान जी बोले, 'कलियुग में मेरी अराधना करने वाले को अशुभ फल नही दोगे।' तभी से शनिवार को हनुमान जी की पूजा की जाती है।

एक बार प्रेम से बोलो शंकट मोचन पवन सुत हनुमान जी की जय !

***भगवन अगर इस लेख में कहीं त्रुटि रह गयी हो, तो छमा करें !

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